धार्मिक

महा शिवरात्रि पर विशेष

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Shivratri festival

भारतीय हिंदू कैलेंडर के अनुसार, शिवरात्रि वार्षिक रूप से मनाया जाने वाला एक प्रमुख धार्मिक त्योहार है। यह पर्व महाशिवरात्रि के रूप में भी जाना जाता है और भगवान शिव की पूजा और अराधना का पवित्र विश्राम है। यह धार्मिक उत्सव भारत और नेपाल के कई हिस्सों में मनाया जाता है। यह उत्सव चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है और हिन्दू कैलेंडर के अनुसार यह वर्ष के मार्च या अप्रैल महीने में पड़ता है।

इस उत्सव में हिन्दू आदिदेवता भगवान शिव की पूजा-अराधना, तांडव नृत्य की प्रदर्शनी और शिव कथाओं की सुनाई जाती है। शिवरात्रि का उत्सव प्रारम्भ होने के पूर्व प्रातःकाल स्नान के साथ श्रावण सोमवार और महाशिवरात्रि के हद्द के समय व्रत रखा जाता है। यह उत्सव अनुयायियों के बीच धार्मिक और कला की बृद्धि को बनाये रखने का माध्यम है।

शिवरात्रि (Shivratri festival) उत्सव का महत्वपूर्ण पहलू है श्रावण पक्ष की हर सोमवार को उत्सव कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है। श्रावण मास, जो जुलाई और अगस्त के बीच होता है, भगवान शिव को विशेष रूप से समर्पित होता है। शिवरात्रि के दौरान लोग अपने प्रिय देवता भगवान शिव की पूजा करते हैं और उनकी कृपा और आशीर्वाद की कामना करते हैं।

इस दिन के अलावा महाशिवरात्रि भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है और उनका ब्रह्ममुहूर्त में ध्यान किया जाता है। यह दिन भगवान शिव के चारों युगों की यात्रा की जाती है।

Shivratri festival पर शिव जी की पूजा की जाती है :-

शिवरात्रि की रात शिवपुराण की कथाओं की सुनाई जाती है और शिव जी की पूजा की जाती है। लोग मंदिर में जाकर शिवलिंग के सामने पूजा अर्चना करते हैं और भगवान शिव को नीलकंठ आम्रित (poison) पीने के बाद की जाने वाली कथा का पाठ करते हैं। यह कथा मान्यता के अनुसार भगवान शिव को अमृत पिलाने के बाद हुई थी और इसीलिए उनका गला नीला (blue) हो गया था।

शिवरात्रि उत्सव (Shivratri festival ) को फलाहारी व्रत के साथ मनाने की परंपरा अवश्य रखी जाती है। इस दिन सभी जातियाँ और समुदाय या तो व्रत रखते हैं या नियमित मांसाहार से दूर रहते हैं। विशेषतः शिवरात्रि के दिन ब्रह्मचर्य (celibacy) का पालन किया जाता है और भक्त श्रीमान भगवान शिव की पूजा करते हैं

शिवरात्रि के दौरान नागरिक आसपास के शिव मंदिरों में जाते हैं और पूरे दिन शिव-शक्ति की पूजा, भजन की आराधना और आरती के भजनों का पाठ करते हैं। शिवरात्रि के दिन धूप देंकर जल चढ़ाते हैं और विभिन्न प्रकार के फल, फूल, धान्य, गुड़ आदि का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

हम महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं?

महाशिवरात्रि पर्व है हमारी चेतना को बढ़ाने का और ध्यान के माध्यम से प्राण शक्ति को बढ़ाकर अपने स्त्रोत की ओर ले जाने का…

पर, शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है? वैसे तो महाशिवरात्रि को लेकर कई कहानियाँ मौजूद हैं। उनमें से कुछ का यहाँ उल्लेख किया जा रहा है:

कहते हैं महाशिवरात्रि के दिन भगवान् शिव ने देवी पार्वती से विवाह किया था|

जब देवता और राक्षस अमृत की खोज में समुद्र मंथन कर रहे थे तब मंथन से विष निकला था और स्वयं भगवान शिव ने विष पी कर उसे अपने कंठ में रोक लिया था जिस वजह से उनका शरीर नीला पड़ गया था और उनको “नीलकंठ” भी कहा जाता है। विष पीकर उन्होंने सृष्टि और देवतागण दोनों को बचा लिया तो इसलिए भी शिवरात्रि का उत्सव मनाया जाता है।

एक और किवदंती यह है कि जब देवी गंगा पूरे उफ़ान के साथ पृथ्वी पर उतर रहीं थी तब भगवान शिव ने ही उन्हें अपनी जटाओं में धरा था। जिससे पृथ्वी का विनाश होने से बच गया था। इसलिए भी इस दिन को शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है और इस दिन शिवलिंग का अभिषेक भी किया जाता है।

ऐसी मान्यता भी है कि भगवान ने शिवरात्रि के दिन सदाशिव जो कि निराकार रूप हैं, उससे लिंग स्वरुप लिया था। इसलिए भक्त रात भर जागकर भगवान शिव की अराधना करते हैं।

 

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