Children Literature Award
साहित्य अकादमी के बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित, देश के लब्ध-प्रतिष्ठित विद्वान प्रोफेसर (डॉ.) दिनेश चमोला ‘शैलेश’ का हिमाचल प्रदेश सिरमौर कला मंच, ददाहू द्वारा सम्मानित किया गया । प्रो. चमोला मंच के 66वें महा अलंकरण सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग करने गए थे । प्रो. चमोला ने जहां मंच पर विभिन्न विधाओं में विशिष्ट अवदान करने वाले देश के 11 विशिष्ट रचनाकारों को शॉल, स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र व पदक प्रदान कर सम्मानित किया, वहीं ‘साहित्य और मानवीय संवेदना’ विषय पर मुख्य अतिथि के रूप में अपना प्रभावी व्याख्यान भी दिया ।
उन्होंने अपने संबोधन ने कहा कि साहित्यकार पर मां वाणी की अद्भुत कृपा दृष्टि रहती है इसलिए वह सत्य को कहने और सहने में सक्षम हो पाता है । वह समाज का भावनात्मक रिपोर्टर होता है जो युगीन विसंगतियों से दो चार होकर अपने चिंतन से जगती को दिशा दृष्टि प्रदान करता है ।
रचनाकार अपनी रचना का पल्लवन-संवर्धन अथवा लालन-पालन एक पुत्री की तरह पूर्ण मनोयोग से करता है; उसे नाना भांति से भावनात्मक अलंकरणों, परिधानों व भावपुष्पों से सुसज्जित कर तराशता व अंत तक दिव्यता व भव्यता प्रदान करता है । जब पुत्री रूपी रचना हर दृष्टि से प्रौढ़ हो जाती है तो उसका सुयोग्य पुस्तक अथवा पत्रिका से लोकार्पण रूपी पाणिग्रहण संस्कार संपन्न करा देता है । फिर वह रचना रूपी पुत्री, रचनाकार रूपी पिता अथवा व्यष्टि की न होकर समष्टि की होकर, समाज की हितैषिणी, मार्गदर्शिका को पथप्रदर्शिका बन जाती है । तब पिता से पुत्री नहीं, बल्कि पुत्री से पिता का नाम जगत में प्रसिद्धि पाता है ।
मंच के कार्यकारी अध्यक्ष, डॉ. ओ पी राही ने कहा कि प्रोफेसर चमोला अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त, लब्ध प्रतिष्ठित विद्वान हैं, मुख्य अतिथि के रूप में उनको आज अपने मध्य पाना हमारे लिए परम सौभाग्य का विषय है । आपके व्यक्तित्व व कृतित्व पर समय -समय पर देश-विदेश में अनेक विख्यात विद्वानों द्वारा अनेक परिसंवाद और संगोष्ठियां संपन्न होती रहती हैं ।
ध्यातव्य है कि 14 जनवरी, 1964 को उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद के ग्राम कौशलपुर में स्व.पं. चिंतामणि चामोला ज्योतिषी एवं श्रीमती माहेश्वरी देवी के घर मेँ जन्मे प्रो. चमोला ने शिक्षा में प्राप्त कीर्तिमानों यथा एम.ए. अंग्रेजी, प्रभाकर; एम. ए. हिंदी (स्वर्ण पदक प्राप्त); पीएच-डी. तथा डी.लिट्. के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में भी राष्ट्रव्यापी पहचान निर्मित की है। अभी तक प्रो. चमोला ने उपन्यास, कहानी, दोहा, कविता, एकांकी, बाल साहित्य, समीक्षा, शब्दकोश, अनुवाद, व्यंग्य, खंडकाव्य, व्यक्तित्व विकास, लघुकथा, साक्षात्कार, स्तंभ लेखन के साथ-साथ एवं साहित्य की विविध विधाओं में लेखन किया है ।
पिछले तेतालीस (43) वर्षों से देश की अनेकानेक पत्र-पत्रिकाओं के लिए अनवरत लिखने वाले चर्चित साहित्यकार, प्रो.चमोला राष्ट्रीय स्तर पर साठ से अधिक सम्मान व पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं व सात दर्जन से अधिक मौलिक पुस्तकों के लेखक के साथ-साथ हिंदी जगत में अपने बहु-आयामी लेखन व हिंदी सेवा के लिए सुविख्यात हैं ।
आपकी चर्चित पुस्तकों में ‘यादों के खंडहर, ‘टुकडा-टुकड़ा संघर्ष, ‘प्रतिनिधि बाल कहानियां, ‘श्रेष्ठ बाल कहानियां, ‘दादी की कहानियां¸ नानी की कहानियां, माटी का कर्ज, ‘स्मृतियों का पहाड़, ’21श्रेष्ठ कहानियां‘ ‘क्षितिज के उस पार, ‘कि भोर हो गई, ‘कान्हा की बांसुरी, ’मिस्टर एम॰ डैनी एवं अन्य कहानियाँ,‘एक था रॉबिन, ‘पर्यावरण बचाओ, ‘नन्हे प्रकाशदीप’, ‘एक सौ एक बालगीत, ’मेरी इक्यावन बाल कहानियाँ, ‘बौगलु माटु त….,‘विदाई, ‘अनुवाद और अनुप्रयोग, ‘प्रयोजनमूलक प्रशासनिक हिंदी, ‘झूठ से लूट’, ‘गायें गीत ज्ञान विज्ञान के’ ‘मेरी 51 विज्ञान कविताएँ’ तथा ‘व्यावहारिक राजभाषा शब्दकोश’ आदि प्रमुख हैं।
हाल ही में आपकी अनेक पुस्तकें- ‘सृजन के बहाने: सुदर्शन वशिष्ठ’; ’21 श्रेष्ठ कहानियां’ (कहानियां); ‘बुलंद हौसले’ (उपन्यास); ‘पापा ! जब मैं बड़ा बनूंगा’; ‘मेरी दादी बड़ी कमाल’ (बाल कविता संग्रह) तथा ‘मिट्टी का संसार’ (आध्यात्मिक लघु कथाएं) आदि प्रकाशित हुई हैं। आपकी संपूर्ण कहानियां इसी वर्ष वृहत खंड (वॉल्यूम) में प्रकाशित हुईं हैं ।
प्रो. चमोला ने 22 वर्षों तक चर्चित हिंदी पत्रिका “विकल्प” का भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून से संपादन किया है तथा दो बार इस पत्रिका को भारत के राष्ट्रपति के हाथों प्रथम व द्वितीय पुरस्कार दिलाया है। आप देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, आयोगों व संस्थानों की शोध समितियों ; प्रश्नपत्र निर्माण व पुरस्कार मूल्यांकन समितियों के सम्मानित सदस्य/विशेषज्ञ हैं।