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स्टैनफोर्ड की लिस्ट में कुलपति डॉ नरपिंदर सिंह को देश में पहली रैंक मिली

Stanford Ranking
Written by Subodh Bhatt

Stanford Ranking

देहरादून। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के 52 शिक्षकों ने दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में जगह बनाकर यूनिवर्सिटी का गौरव बढ़ाया है। यह सूची अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एल्सेवियर के सहयोग से तैयार की है। इस यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ नरपिंदर सिंह की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की सूची में अब तक के करियर के आधार पर देश में पहली रैंकिंग है

ग्राफिक एरा की यह सफलता विभिन्न विषयों में उच्चस्तरीय शोध, प्रभावशाली शोध प्रकाशनों और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों को दर्शाती है। शोध के क्षेत्र में शिक्षकों का यह योगदान यूनिवर्सिटी की वैश्विक अकादमिक पहचान को मजबूत करने के साथ ही वैज्ञानिक ज्ञान को आगे बढ़ाने और समकालीन चुनौतियों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

ग्राफिक एरा के कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह ने एक बार फिर इस प्रतिष्ठित सूची में जगह बनाई है। करियर शुरू होने से 2025 तक एग्रिकल्चर, फिशरीज़ और फॉरेस्ट्री में उनकी विश्वभर में 116वीं रैंकिंग है। वहीं फूड साइंस में उनकी विश्वभर में 55वीं रैंकिंग है। भारत में एग्रिकल्चर, फिशरीज़ और फॉरेस्ट्री एवं फूड साइंस में उनकी पहली रैंकिंग है। यह उपलब्धि कृषि और खाद्य विज्ञान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के साथ-साथ ग्राफिक एरा में शोध और नवाचार को मिल रहे प्रोत्साहन को भी रेखांकित करती है।

ग्राफिक एरा के 52 शिक्षकों का इस वैश्विक सूची में शामिल होना यूनिवर्सिटी की शोध क्षमता और निरंतर प्रगति का प्रमाण है। इस सूची में शामिल शिक्षकों में डॉ. अज़मल हुसैन, डॉ. ए. कर्णवाल, डॉ. मोहित बजाज, डॉ. जी. मुरली, डॉ. मोहम्मद वाज़िद, डॉ. मनोज दिवाकर, डॉ. मनु शर्मा, डॉ. अजय सिंह वर्मा, डॉ. विनय कुमार पांडेय, डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. मंगे राम और डॉ. राकेश कुमार सहित अन्य शिक्षक शामिल हैं।

ग्राफिक एरा ग्रुप का इंस्टीट्यूशंस के अध्यक्ष डॉ कमल घनशाला इस शानदार उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह शिक्षा की गुणवत्ता, गंभीर और प्रभावी शोधों का सुपरिणाम है। ग्राफिक एरा शिक्षा और तकनीकों को देश- दुनिया की जरूरतों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। विश्व पटल पर ग्राफिक एरा के इतने अधिक शिक्षकों को रैंकिंग में शामिल किया जाना इस दिशा में उठाए गए कदमों की सार्थकता दर्शाता है।

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