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आईफैड प्रतिनिधिमंडल ने रीप पहलों का किया भ्रमण, सगंध पौधा केंद्र और रेशम निदेशालय का किया दौरा

IFAD Delegation
Written by Subodh Bhatt

IFAD Delegation

देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (आईफैड) के कार्यकारी बोर्ड के सदस्यों ने बोर्ड के वार्षिक देश भ्रमण के अंतर्गत देहरादून में आईफैड द्वारा समर्थित ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (रीप) का भ्रमण किया। इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि ग्रामीण समुदाय उत्पादन से बाज़ार तक की यात्रा किस प्रकार तय करते हैं — प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांड निर्माण और खरीदारों तक पहुँच — तथा इन सभी चरणों में वित्त तक पहुँच की भूमिका कितनी अहम है।

प्रतिनिधिमंडल ने ज़मीनी स्तर पर आईफैड द्वारा वित्तपोषित कार्यों, विशेष रूप से सगंध पौधा केंद्र (कैप) तथा रेशम निदेशालय के साथ संचालित पहलों का अवलोकन किया और इनसे जुड़े किसानों, उद्यमियों एवं सामुदायिक संस्थाओं से सीधा संवाद किया। प्रतिनिधिमंडल का स्वागत परियोजना निदेशक, रीप; निदेशक, कैप तथा निदेशक, रेशम द्वारा किया गया।

कैप में प्रतिनिधिमंडल ने सर्वप्रथम नर्सरी हेतु उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) का भ्रमण किया। इसके पश्चात उन्होंने प्रोडक्ट लैब, जहाँ दालचीनी से निर्मित उत्पाद प्रदर्शित किए गए थे, और फिर एरोमा लैब एवं परफ्यूमरी का अवलोकन किया। तत्पश्चात प्रतिनिधिमंडल ने कैप पहल के लाभार्थियों से संवाद किया तथा कैप में प्रदर्शित हाउस ऑफ हिमालयाज़ (HoH) उत्पादों में विशेष रुचि दिखाई।

प्रतिनिधिमंडल ने रेशम विभाग के दून सिल्क आउटलेट का भी भ्रमण किया, जहाँ उन्हें रेशम कीट के जीवन चक्र तथा कोकून से रेशम तैयार करने की प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने बुनाई केंद्र एवं आउटलेट का भ्रमण किया तथा लाभार्थियों से संवाद किया।
आभार व्यक्त करते हुए सुश्री झरना कमठान, आईएएस, परियोजना निदेशक, रीप ने कहा, “हम समावेशी ग्रामीण विकास के प्रति आईफैड के निरंतर सहयोग, मार्गदर्शन एवं प्रतिबद्धता के लिए हृदय से आभारी हैं।”

रीप का क्रियान्वयन उत्तराखण्ड सरकार के ग्राम्य विकास विभाग के अंतर्गत उत्तराखण्ड ग्राम्य विकास समिति (यूजीवीएस) द्वारा राज्य के सभी 13 जनपदों एवं 95 विकासखण्डों में किया जा रहा है। वर्ष 2022 से अब तक परियोजना लगभग 4,44,000 ग्रामीण परिवारों तक पहुँच चुकी है तथा 10,000 से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के साथ-साथ 14,000 से अधिक अति-निर्धन परिवारों को सहयोग प्रदान कर चुकी है।

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