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CIMS कॉलेज प्री-कॉन्क्लेव: सतत विकास में मानसिक स्वास्थ्य की अहम भूमिका

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Written by Subodh Bhatt

Mental Health in Development

देहरादून: सतत विकास और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए सजग इंडिया ने यूकॉस्ट एवं राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, उत्तराखंड के सहयोग से सीआईएमएस कॉलेज में “सतत विकास एवं मानसिक स्वास्थ्य: एक सशक्त भविष्य के लिए” विषय पर प्री-कॉन्क्लेव पैनल चर्चा का आयोजन किया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य अब हाशिये का विषय नहीं, बल्कि एक सशक्त और लचीले समाज के निर्माण की आधारशिला है।

राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तराखंड के सहायक निदेशक डॉ. पंकज कुमार ने युवाओं में तेजी से बढ़ रहे डिप्रेशन, एंग्जायटी, तनाव और आत्मसम्मान की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि जिज्ञासा और साथियों के दबाव के कारण नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिसे समय रहते सही मार्गदर्शन से रोका जा सकता है।

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उन्होंने शैक्षणिक दबाव को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण बताते हुए छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच पारदर्शी संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को समाप्त करने, सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने और टेली-मानस हेल्पलाइन (14416) के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही।

उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के वैज्ञानिक डॉ. ओम प्रकाश नौटियाल ने कहा कि संचार की कमी, धैर्य की कमी और अभ्यास का अभाव मानसिक समस्याओं को बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की चुनौतियां अवसाद को बढ़ावा दे रही हैं और युवाओं को समस्याओं से भागने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। उन्होंने युवाओं को मेहनत, सही दिशा और निरंतर प्रयास के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

काउंसलर मनोवैज्ञानिक डॉ. दीप्ति ध्यानी ने मानसिक स्वास्थ्य और सतत विकास के बीच गहरे संबंध को स्पष्ट करते हुए व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए। उन्होंने 5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक और 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक को एंग्जायटी और ओवरथिंकिंग को नियंत्रित करने के प्रभावी उपाय बताया।लाइव डेमो के माध्यम से उन्होंने प्रतिभागियों को अपनी इंद्रियों के जरिए वर्तमान क्षण में लौटने का अभ्यास कराया-पांच चीजें देखना, चार आवाजें सुनना, तीन चीजों को स्पर्श करना, दो गंध पहचानना और एक स्वाद पर ध्यान केंद्रित करना।

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इस प्रक्रिया से तनाव कम करने और मन को स्थिर रखने में मदद मिलती है।सजग के संस्थापक एवं राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के सदस्य ललित जोशी ने कहा कि हमारे आसपास का सामाजिक वातावरण हमारे व्यक्तित्व और मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करता है। उन्होंने सकारात्मक संगति और सही दृष्टिकोण को सफलता की कुंजी बताते हुए कहा कि “जब आप अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं, तो परिणाम दो ही होते हैं या तो आप सफल होते हैं या कुछ नया सीखते हैं।” उन्होंने नकारात्मक लोगों से दूरी बनाने और सकारात्मक ऊर्जा वाले वातावरण में रहने की सलाह दी।

कार्यक्रम के अंत में सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। साथ ही समाज में जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को मानसिक रूप से सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।आयोजकों ने अंत में सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और इस पहल को मानसिक स्वास्थ्य को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

इस अवसर पर कालेज के प्रबंध निदेशक संजय जोशी , प्रिंसिपल डा चेतना , डा मेघा पंत, डा अदिति पांडेय, शेखर शर्मा, डा प्रियंका गुसाईं, डा अंजना गुसाई, पंकज सजवान, ख़ुशी सहित 300 छात्र छात्राओं ने प्रतिभाग किया।

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