धार्मिक उत्तराखंड

श्री नृसिंह नव दुर्गा सेवा समिति के तत्वाधान में श्रीराम के राजतिलक के साथ रामलीला सम्पन्न

Shri Ram coronation
Written by Subodh Bhatt

Shri Ram coronation

  • सुखद, निरापद तीर्थयात्रा की कामना के साथ प्रतिवर्ष भगवान बदरी विशाल के कपाट खुलने से पूर्व वर्षों से हो रही यह रामलीला

ज्योतिर्मठ। श्री नृसिंह नव दुर्गा सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित रामलीला महायज्ञ का सोमवार को श्री राम राज्याभिषेक के साथ समापन हो गया। राज्याभिषेक से पूर्व श्री राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान आदि को सुन्दर झांकी के साथ कीर्तन /भजन करते हुए रामलीला मंच तक पहुँचाया गया, जहाँ भाई भरत से मिलन के उपरांत गुरु वशिष्ठ द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ भगवान श्री राम का तिलक कर राज्याभिषेक किया गया।
श्री राम द्वारा राज्य के समाचार सुनाने की आज्ञा देने पर मंत्री सुमंत द्वारा प्रजा का हाल समाचार सुनाया गया, सुमंत के इस गाने पर दर्शक भी मंत्र मुग्ध हो गए।

राजतिलक की सभी प्रक्रियाएँ पूर्ण होने के बाद भगवान श्री राम द्वारा हनुमान को विदाई स्वरूप माला दिए जाने पर रामभक्त हनुमान का बेहद मार्मिक गाना जो दर्शकों को भाव विभोर कर गया।

दस दिवसीय इस रामलीला महायज्ञ मे पूरे जोशीमठ क्षेत्र सहित दूर दूर से भी भक्तों ने राम भेंट के रूप मे आर्थिक सहयोग किया, सबसे ज्यादा चर्चा एक ऐसे रामभक्त की रही जिन्होंने अपना नाम नहीं बताए जाने की शर्त पर राम भेंट के रूप मे 75 हजार रुपये की धनराशि भेंट की। इसी प्रकार तपोवन- विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना एनटीपीसी ने 51हजार रुपये की धनराशि आर्थिक सहयोग के रूप मे प्रदान की।

इनके अलावा देवपूजाई समिति जोशीमठ, श्री हेमकुंड साहिब मैंनेजमेंट ट्रस्ट, रामलीला कमेटी पाण्डुकेश्वर, मेरग, बड़ागांव, ढाक के साथ ही पंचवटी होटल ने भी विशेष आर्थिक सहयोग किया है, दस दिवसीय इस रामलीला महायज्ञ मे बीकेटीसी, नगर पालिका परिषद, विभिन्न राजनैतिक दल, ब्यापार संगठन, विभिन्न एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी पहुंचकर पात्रों एवं कमेटी का उत्साहबर्धन किया है।

श्री नृसिंह-नव दुर्गा सेवा समिति के अध्यक्ष भुवन चन्द्र उनियाल ने स्थानीय प्रशासन, पुलिस प्रशासन, श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति, नगर पालिका, गुरुद्वारा जोशीमठ, एनटीपीसी सहित सभी धर्म परायण जनता का समिति की ओर से आभार ब्यक्त करते हुए कहा कि यूँ तो सीमांत नगर जोशीमठ मे रामलीला मंचन की पौराणिक परंपरा है और तब इस नगर के ही अलग अलग स्थानों पर मंचन होता था, लेकिन वर्ष 1972 से इसी स्थान पर रामलीला का मंचन हो रहा है और यह मंचन प्रतिवर्ष भगवान बद्रीविशाल के कपाट खुलने से पूर्व सुखद यात्रा की कामना को लेकर किया जाता है।

उन्होंने श्री रामलीला मंचन से जुड़े सभी पात्रों, संगीत टीम के सदस्यों, निर्देशकों, साज सज्जा व स्टोर व्यवस्था से जुड़े कार्यकर्त्ताओं का विशेष आभार व्यक्त किया।

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