Pt. Ravi Shankar Shukla University
पं.रवि शंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छत्तीसगढ़) के यूजीसी मान्यता प्राप्त मदन मोहन मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर के द्वारा दिनांक 7 जनवरी से 21 जनवरी, 2026 तक आयोजित भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अध्ययन विषयक ऑनलाइन पुनश्चर्या पाठयक्रम में विषय विशेषज्ञ (Resource Person) के रूप में प्रख्यात साहित्यकार, साहित्य अकादमी के बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार, प्रो. दिनेश चमोला ‘शैलेश’ ने ‘भाषा, साहित्य एवं संस्कृति में अनुवाद की भूमिका’ विषयक प्रभावी व्याख्यान दिया । इसमें संपूर्ण भारत से 110 महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के हिंदी, गणित, बौद्ध-अध्ययन, इतिहास, संस्कृत, अंग्रेजी तथा अन्य विज्ञान विषयों के सहायक प्रोफेसर सम्मिलित थे । संस्कृति तथा अनुवाद के विभिन्न सोपानों, आयामों तथा पहलुओं पर सांस्कृतिक संदर्भों तथा विविध भाषाओं के वैयाकरणिक संरचनात्मक दृष्टांतों एवं प्रमाणों के साथ व्याख्यान अत्यंत प्रभावी रहा तथा श्रोताओं ने इसकी प्रशंसा की । व्याख्यान के अंत में विभिन्न प्रतिभागियों द्वारा प्रश्न रूप में अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त की गईं, जिनका प्रामाणिक समाधान एवं उत्तर दिया गया ।
ध्यातव्य है 14 जनवरी, 1964 को उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद के ग्राम कौशलपुर में स्वर्गीय पं. चिंतामणि चमोला ज्योतिषी एवं माहेश्वरी देवी चमोला के घर में जन्मे प्रो. चमोला ने शिक्षा में प्राप्त कीर्तिमानों यथा एम.ए. अंग्रेजी, प्रभाकर; एम. ए. हिंदी (स्वर्ण पदक प्राप्त); पीएच-डी. तथा डी.लिट्. के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में भी राष्ट्रव्यापी पहचान निर्मित की है। अभी तक प्रो. चमोला ने उपन्यास, कहानी, दोहा, कविता, एकांकी, बाल साहित्य, समीक्षा, शब्दकोश, अनुवाद, व्यंग्य, लघुकथा, साक्षात्कार, स्तंभ लेखन के साथ-साथ एवं साहित्य की विविध विधाओं में सात दर्जन से अधिक पुस्तकों में लेखन किया है । आपके व्यापक मौलिक साहित्य देश के अनेक विश्वविद्यालयों में पीएच-डी.तथा एम.फिल. स्तरीय कई शोध कार्य संपन्न हो चुके हैं तथा अनेक विश्वविद्यालयों में वर्तमान में चल रहे हैं ।
अभी तक अपनी उत्कृष्ट साहित्यिक सेवाओं के लिए आपको देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा ‘सहित्यश्री’, ‘साहित्य भास्कर’, ‘विद्यासागर’, ‘युवा साहित्यकार सम्मान’, ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान’, ‘उत्तरांचल रत्न सम्मान’ , ‘डॉ. गोविंद चातक सम्मान’, ‘उत्तराखंड शोध संस्थान सम्मान’, ‘बाल साहित्यकार सम्मान’ ‘संपादक शिरोमणि सम्मान’, ‘उत्कृष्ट बाल साहित्य पुरस्कार’, ‘हिंदी गौरव सम्मान’, ‘राष्ट्रीय राजभाषा शील्ड सम्मान’, ‘हिंदी भूषण सम्मान’, पंडित शिव शंकर दुबे स्मृति पुरस्कार’, ‘चंद्र कुंवर बर्त्वाल सम्मान’, ‘ परमार पुरस्कार’, तुरशन पाल पाठक बाल विज्ञान लेखन पुरस्कार’, ‘विवेकानंद सम्मान’, ‘राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान’,श्री श्याम सुधा परिमार्जन बाल साहित्य सम्मान’, ‘बाल साहित्य पुरस्कार’ (साहित्य अकादमी), ‘डॉ. राम जिनका किंकर सम्मान’, ‘डॉ. राष्ट्रबंधु सम्मान’ आदि अनेक सम्मान/पुरस्कार’ प्राप्त हुए हैं ।
आपकी चर्चित पुस्तकों में ‘यादों के खंडहर, ‘टुकडा-टुकड़ा संघर्ष, ‘प्रतिनिधि बाल कहानियां, ‘श्रेष्ठ बाल कहानियां, ‘दादी की कहानियां¸ नानी की कहानियां, माटी का कर्ज, ‘स्मृतियों का पहाड़, ‘क्षितिज के उस पार, ‘कि भोर हो गई, ‘कान्हा की बांसुरी, ’मिस्टर एम॰ डैनी एवं अन्य कहानियाँ,‘एक था रॉबिन, ‘पर्यावरण बचाओ, ‘नन्हे प्रकाशदीप’, ‘एक सौ एक बालगीत, ’मेरी इक्यावन बाल कहानियाँ, ‘बौगलु माटु त….,‘विदाई, ‘अनुवाद और अनुप्रयोग, ‘प्रयोजनमूलक प्रशासनिक हिंदी, ‘झूठ से लूट’, व मिट्टी का संसार’;’गायें गीत ज्ञान विज्ञान के’ ‘मेरी 51 विज्ञान कविताएँ’ तथा ‘व्यावहारिक राजभाषा शब्दकोश’* आदि प्रमुख हैं। आपके संपादन में प्रकाशित बहुचर्चित हिंदी पत्रिका ‘विकल्प’ ने राष्ट्रीय स्तर पर अपने महत्वपूर्ण विशेषांकों के माध्यम से अपनी अलग पहचान अर्जित की है। डॉ॰ चमोला ने भारत सरकार में संयुक्त निदेशक (हिन्दी) सहित विभिन्न सरकारी पदों पर कार्य किया है तथा पूर्व में आप भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून में राजभाषा के प्रमुख रहे हैं तथा वर्तमान में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आधुनिक ज्ञान विज्ञान संकाय के पूर्व डीन, कुलानुशासक तथा भाषा एवं आधुनिक ज्ञान विज्ञान के अध्यक्ष रहे हैं । आप गढ़ विहार, फेज-1, देहरादून में रहते हैं ।
डॉ॰ चमोला ने देश के शताधिक विद्वानों के साक्षात्कार लिए हैं। अपने अनेक साक्षात्कार, रचनाओं का प्रसारण देश के 8 दूरदर्शन केंद्रों तथा 12 आकाशवाणी केंद्रों से प्रसारित हुए हैं । आप देश-विदेश की सैकड़ों पत्र-पत्रिकाओं के स्थापित लेखक हैं ।
आपके उपन्यास ‘टुकड़ा-टुकड़ा संघर्ष’ का कन्नड़ भाषा तथा अनेक रचनाओं का विभिन्न भारतीय देशी-विदेशी भाषाओं में अनुवाद एवं प्रकाशन हुआ ।


