Ankita murder case
देहरादून। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से आज आयोजित पत्रकार वार्ता में अंकिता भंडारी हत्याकांड के तीनों दोषियों द्वारा सजा कम करने और जमानत की मांग का कड़ा विरोध किया गया। मंच ने मांग की कि राज्य सरकार इस मामले में पूरी मजबूती से पैरवी करे और यह सुनिश्चित करे कि दोषियों की सजा किसी भी परिस्थिति में कम न हो तथा उन्हें जमानत न मिले।
पत्रकार वार्ता को निर्मला बिष्ट, सुजाता पॉल, मोहित डिमरी, उमा भट्ट, हरिओम पाली एवं विमला कोहली ने संबोधित किया।
निर्मला बिष्ट ने कहा कि 20 जुलाई को न्यायालय में मामले की सुनवाई निर्धारित है, जिसमें तीनों दोषियों द्वारा सजा कम करने और जमानत की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को पूरी मजबूती से पैरवी कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दोषियों की सजा कम न हो और उन्हें किसी भी प्रकार की राहत न मिले। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरी ओर CBI जांच की धीमी गति गंभीर चिंता का विषय है। उत्तराखंड में रिजॉर्ट संस्कृति, नशे का कारोबार और बेटियों के सम्मान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सुजाता पॉल ने कहा कि मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए इस मामले में निष्पक्ष न्याय की उम्मीद करना कठिन है। उन्होंने कहा कि मंच लगातार यह सवाल उठा रहा है कि जिन लोगों के नाम कथित VIP एंगल में सामने आए हैं, जिनमें उर्मिला सनावर द्वारा लिए गए अन्य नाम शामिल हैं, उनसे अब तक CBI ने पूछताछ क्यों नहीं की। उन्होंने बुलडोजर चलाकर साक्ष्य नष्ट किए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की भी मांग की।
मोहित डिमरी ने कहा कि जनदबाव के बाद मुख्यमंत्री ने तीन वर्ष पश्चात सीबीआई जांच की घोषणा की, लेकिन अंकिता के माता-पिता द्वारा दिए गए प्रार्थना-पत्र के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराने के बजाय एक ऐसे व्यक्ति से शिकायत दर्ज कराई गई, जिसने इस मामले पर पहले कभी कोई सार्वजनिक भूमिका नहीं निभाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार शुरू से ही मामले में लीपापोती करने में लगी रही है। उनका कहना था कि छह महीने की सीबीआई जांच के बाद भी किसी ठोस प्रगति का न होना इस आशंका को बल देता है कि जांच को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डालकर कथित वीआईपी अपराधियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उमा भट्ट ने कहा कि 18 सितंबर को अंकिता भंडारी हत्याकांड के चार वर्ष पूरे हो जाएंगे। यदि उससे पहले CBI ने जांच पूरी कर दोषियों और कथित VIP एंगल पर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा।
विमला कोली ने कहा कि हत्याकांड में भाजपा से जुड़े लोगों की भूमिका के आरोप सामने आने के कारण राज्य सरकार ने शुरू से ही निष्पक्ष जांच के बजाय मामले को दबाने और आरोपितों को संरक्षण देने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय दिलाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है और सरकार को इस मामले में जवाबदेह होना होगा।
मंच ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने शुरू से ही इस मामले में आरोपितों को संरक्षण दिया है। मंच का कहना था कि जब भाजपा पदाधिकारी दुष्यंत गौतम और अजय कुमार के नाम कथित रूप से वीआईपी के रूप में सामने आए, तब भी सरकार ने उनके विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। मंच ने यह भी कहा कि चूंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वनंतरा रिज़ॉर्ट पर बुलडोजर चलाने के आदेश दिए थे, इसलिए सबूत नष्ट करने के आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उनका मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा लिया जाना चाहिए, क्योंकि उनके पद पर बने रहने से जांच प्रभावित होने की आशंका है।
मंच ने बताया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में 20 जुलाई को उच्च न्यायालय में हत्यारों की सुनवाई से पहले आज नैनीताल में भी बैठक एवं प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें आरोपियों को दी गई आजीवन कारावास की सजा को मृत्युपर्यंत कारावास में परिवर्तित किए जाने की मांग उठाई गई।
प्रेस वार्ता में बड़ी संख्या में महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से मंजू बलोदी, पद्मा गुप्ता, विजया नैथानी, मातेश्वरी रजवार, शांता नेगी, कुंवारा देवी, कृष्णा सकलानी, त्रिलोचन भट्ट, ईश्वर शर्मा, राघवेंद्र तथा राजू सिंह शामिल रहे।


