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खाकी में सुरों की सरगम: अन्नपूर्णा बिष्ट की कोयल सी आवाज पर फिदा हुआ उत्तराखंड

The gamut of notes in khaki
Written by Subodh Bhatt

The gamut of notes in khaki

  • पुलिस की सख्त ड्यूटी के बीच भी संगीत की साधना, 19 साल से दोनों जिम्मेदारियां साथ निभा रहीं अन्नपूर्णा

देहरादून। उत्तराखंड पुलिस की खाकी वर्दी में जहां एक ओर कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और जिम्मेदारी का प्रतीक नजर आता है, वहीं इसी खाकी में एक ऐसी मधुर आवाज भी बसती है जिसने अपने सुरों से पूरे उत्तराखंड को मंत्रमुग्ध कर दिया है। यह आवाज है उत्तराखंड पुलिस की कर्मठ और प्रतिभाशाली महिला कर्मी अन्नपूर्णा बिष्ट की, जिनकी कोयल सी मधुर आवाज आज पहाड़ से लेकर मैदान तक लोगों के दिलों में खास जगह बना चुकी है।

साल 2007 में उत्तराखंड पुलिस में भर्ती हुई अन्नपूर्णा बिष्ट ने अपने कर्तव्यों को हमेशा प्राथमिकता दी, लेकिन संगीत के प्रति उनका प्रेम कभी कम नहीं हुआ। बचपन से ही गाने का शौक रखने वाली अन्नपूर्णा ने अपनी इस प्रतिभा को केवल शौक तक सीमित नहीं रखा बल्कि इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

पुलिस की व्यस्त ड्यूटी के बावजूद उन्होंने संगीत को निखारने के लिए तीन वर्ष की विधिवत संगीत डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने अपनी गायकी को नया आयाम देते हुए 30 से अधिक गीतों की एल्बम में अपनी आवाज दी। उनकी गायकी की खासियत यह है कि उसमें पहाड़ की सादगी, लोक संस्कृति की मिठास और भावनाओं की गहराई साफ झलकती है।

अन्नपूर्णा बिष्ट की प्रतिभा को जल्द ही बड़े मंच भी मिलने लगे। छोटे-छोटे कार्यक्रमों से शुरुआत करने वाली अन्नपूर्णा आज बड़े मंचों की पहचान बन चुकी हैं। भजन सम्राट अनूप जलोटा जैसे दिग्गज गायक ने भी उनकी प्रतिभा को सराहा और उन्हें मंच दिया। उत्तराखंड पुलिस के विशेष गीत में अनूप जलोटा और अन्नपूर्णा बिष्ट ने एक साथ अपनी आवाज दी, जिसने लोगों के दिलों में खास जगह बना ली। इतना ही नहीं, अन्नपूर्णा बिष्ट को बॉलीवुड के प्रसिद्ध गायक सोनू निगम के साथ भी मंच साझा करने का अवसर मिला। यह उनके लिए ही नहीं बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय माना जाता है।

करीब 19 वर्षों की पुलिस सेवा के दौरान अन्नपूर्णा बिष्ट ने यह साबित कर दिया कि यदि हौसले बुलंद हों तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। खाकी वर्दी की जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने संगीत की साधना को भी पूरी लगन से निभाया। ड्यूटी के बीच समय निकालकर रियाज करना और फिर मंचों पर अपनी आवाज का जादू बिखेरना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।

अब तक अन्नपूर्णा बिष्ट तीन दर्जन से अधिक मंचों पर अपनी शानदार प्रस्तुति दे चुकी हैं। उनकी गायकी सुनकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और हर कार्यक्रम में उन्हें भरपूर सराहना और प्यार मिलता है। अन्नपूर्णा की पहचान केवल एक गायिका के रूप में ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति की सशक्त आवाज के रूप में भी बन चुकी है। वे गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी लोकगीतों को अपनी मधुर आवाज में प्रस्तुत कर पहाड़ की संस्कृति और परंपराओं को नई पहचान दे रही हैं।

उनकी बेहतरीन गायकी और योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कारों और सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है। वे अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार और उत्तराखंड पुलिस विभाग के अधिकारियों व सहकर्मियों को देती हैं, जिनके सहयोग और प्रोत्साहन ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

आज अन्नपूर्णा बिष्ट उस नई सोच और ऊर्जा की प्रतीक बन चुकी हैं, जो यह साबित करती है कि खाकी वर्दी केवल कानून व्यवस्था की पहचान नहीं, बल्कि प्रतिभा और जुनून का भी प्रतीक हो सकती है। खाकी की जिम्मेदारी और सुरों की मिठास को साथ लेकर चलने वाली अन्नपूर्णा बिष्ट आज उत्तराखंड की उन बेटियों में शामिल हो चुकी हैं जिनकी आवाज सुनकर लोग कहते हैं यह केवल गायन नहीं, बल्कि पहाड़ की आत्मा की गूंज है।

अन्नपूर्णा बिष्ट के अनूप जलोटा और सोनू निगम भी हुए मुरीद कहते हैं कि अगर दिल में जुनून हो, तो वर्दी की सख्त ड्यूटी भी कला के आड़े नहीं आती। उत्तराखंड पुलिस की एक अनूप जलोटा और सोनू निगम भी हुए मुरीद हुए। अन्नपूर्णा की प्रतिभा की गूंज केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं रही। भजन सम्राट अनूप जलोटा ने न केवल उन्हें मंच दिया, बल्कि ‘उत्तराखंड पुलिस सॉन्ग’ में उनके साथ अपनी आवाज भी साझा की। इतना ही नहीं, सुरीले गायक सोनू निगम के साथ उनकी जुगलबंदी ने यह साबित कर दिया कि खाकी के पीछे एक विश्वस्तरीय कलाकार छिपा है।

गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी: हर बोली में बिखेरा जादू : अन्नपूर्णा बिष्ट ने केवल गाने नहीं गाए, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति को अपनी आवाज से सींचा है। तीन दर्जन से ज्यादा बड़े मंचों पर उन्होंने गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी गीतों की ऐसी तान छेड़ी कि जनता झूमने पर मजबूर हो गई। अब तक 30 से ज्यादा एल्बम्स में काम कर चुकी अन्नपूर्णा आज हर घर की पसंद बन चुकी हैं।

विभागीय सहयोग और परिवार का अटूट साथअक्सर माना जाता है कि पुलिस की नौकरी में निजी शौक के लिए समय नहीं मिलता, लेकिन अन्नपूर्णा खुशकिस्मत हैं कि उन्हें पुलिस विभाग के आला अधिकारियों और साथी कर्मचारियों का भरपूर सहयोग मिला। माता-पिता और परिवार की प्रेरणा ने उनके इस सफर को और भी आसान बना दिया, जिससे वे बिना रुके अपनी साधना जारी रख पाईं। तीन दर्जन मंच और अनगिनत सम्मान बचपन से गाने का शौक रखने वाली अन्नपूर्णा आज सैकड़ों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। दर्जनों पुरस्कारों से सम्मानित यह कलाकार डियूटी के दौरान भी समय निकालकर संगीत की सेवा करती हैं। उनकी कोयल जैसी आवाज ने न केवल जनता का प्यार जीता है, बल्कि उत्तराखंड पुलिस का नाम भी पूरे देश में रोशन किया है। मेरे लिए खाकी मेरी जिम्मेदारी है और संगीत मेरी आत्मा। जब तक सांसें हैं, ये दोनों साथ-साथ चलते रहेंगे।

खाकी के भीतर छिपी है ‘पहाड़ की कोयल’:
मिलिए पुलिसकर्मी अन्नपूर्णा बिष्ट से, जिनकी आवाज की कायल हुई दुनिया!

ऐसी जांबाज सिपाही, जिन्होंने अपराधी पकड़ने वाले हाथों में जब माइक थामा, तो पूरा पहाड़ उनकी आवाज का दीवाना हो गया। हम बात कर रहे हैं अन्नपूर्णा बिष्ट की, जिन्होंने 19 साल की पुलिस सेवा के साथ-साथ संगीत की दुनिया में वो मुकाम हासिल किया है, जो आज हर उत्तराखंडी के लिए गर्व का विषय है। वर्दी का फर्ज और सुरों का संगम: 2007 से अब तक का बेमिसाल सफरसाल 2007 में जब अन्नपूर्णा पुलिस बल में भर्ती हुईं, तो लगा शायद संगीत पीछे छूट जाएगा। लेकिन उन्होंने ड्यूटी की व्यस्तता के बीच भी रियाज नहीं छोड़ा। संगीत के प्रति अपनी इसी दीवानगी को उन्होंने 3 साल की प्रोफेशनल डिग्री लेकर एक नई धार दी। आज वह ‘कर्तव्य’ और ‘कला’ के बीच एक ऐसा संतुलन बना रही हैं, जो मिसाल बन गया है।

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