साहित्य

प्रो. (डॉ.) दिनेश चमोला ‘शैलेश’ के सृजन-मूल्यांकन’ विषय पर 23वाँ राष्ट्रीय व्याख्यान संपन्न

confluence of science and literature
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दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, मद्रास के संयोजन में साहित्य अकादमी बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित चर्चित साहित्यकार प्रो. (डॉ.) दिनेश चमोला ‘शैलेश’ के साहित्यिक अवदान पर आधारित श्रृंखला का 23वाँ राष्ट्रीय ऑनलाइन व्याख्यान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह व्याख्यान विशेष रूप से उनके चर्चित विज्ञान कविता संग्रह ‘मेरी 51 विज्ञान कविताएँ’ पर केंद्रित रहा।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्वोत्तर पर्वतीय केंद्रीय विश्वविद्यालय, शिलांग के कुलपति प्रो. प्रभा शंकर शुक्ल ने की। महाराजा सयाजीराव बड़ौदा विश्वविद्यालय, गुजरात की समालोचक एवं डीन प्रो. कल्पना गवली विशिष्ट अतिथि रहीं, जबकि मिज़ोरम केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व डीन प्रो. सुशील कुमार शर्मा ने आमंत्रित विद्वान के रूप में विचार रखे।

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अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. प्रभा शंकर शुक्ल ने कहा कि “डॉ. दिनेश चमोला ‘शैलेश’ हिंदी में विज्ञान लेखन की परंपरा को कविता के माध्यम से आगे बढ़ाने वाले विलक्षण साहित्यकार हैं। उनकी कृति ‘मेरी 51 विज्ञान कविताएँ’ न केवल शब्दकोश और ज्ञान का विस्तार करती है, बल्कि युवा पीढ़ी में वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी विकसित करती है।”

आमंत्रित विद्वान प्रो. सुशील कुमार शर्मा ने कहा कि “साहित्य भावनाओं का और विज्ञान तर्क का क्षेत्र है। किंतु जब दोनों का संगम होता है, तब ज्ञान और संवेदना का अद्भुत समन्वय सामने आता है। ‘मेरी 51 विज्ञान कविताएँ’ इसी प्रयोग का श्रेष्ठ उदाहरण है।” उन्होंने कृति की कविताओं को तीन श्रेणियों—चेतनापरक, आत्मकथात्मक और विषय-विशेष पर आधारित—के रूप में चिह्नित किया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. कल्पना गवली ने कहा कि “प्रो. चमोला का साहित्य बहुआयामी है। इस संग्रह में पर्यावरण, जैव-विविधता और वैज्ञानिक चेतना जैसे विषयों पर गंभीर और तथ्यात्मक चित्रण मिलता है। यदि इन कविताओं को गायन, वादन और चित्रकला जैसे माध्यमों से बच्चों के समक्ष प्रस्तुत किया जाए तो उनकी सोच और दृष्टि पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।”

प्रो. दिनेश चमोला ‘शैलेश’ ने कविता, कहानी, उपन्यास, व्यंग्य, लघुकथा, समीक्षा, अनुवाद, बाल साहित्य और राजभाषा लेखन तक में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की है। सबसे कम उम्र में साहित्य अकादमी बाल साहित्य पुरस्कार पाना उनकी लेखनी की उत्कृष्टता का प्रमाण है। ‘मेरी 51 विज्ञान कविताएँ’ को हिंदी साहित्य में विज्ञान कविता की परंपरा का सूत्रपात करने वाला संग्रह माना जा रहा है।

समारोह का संचालन भावना गौड़ ने किया और धन्यवाद ज्ञापन विनीता सेतुमाधवन ने प्रस्तुत किया। अंत में प्रो. चमोला ने सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “विज्ञान और साहित्य का मेल ही भविष्य की नई चेतना का मार्ग प्रशस्त करेगा।”

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