मकर संक्रांति का महत्व
माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी भूलाकर उनके घर गए थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा आदि करने से व्यक्ति का पुण्य प्रभाव हजार गुना बढ़ जाता है।
इस दिन से मलमास खत्म होने के साथ शुभ माह प्रारंभ हो जाता है। इस खास दिन को सुख और समृद्धि का दिन माना जाता है। इस दिन सूर्य, बृहस्पति और अन्य पांच ग्रहों के साथ षडग्रही योग बना रहा है। इस वर्ष मकर संक्रांति पर्व का महत्व इसके गुरुवार को होने के कारण और भी बढ़ गया है। यह अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है। ज्योतिषाचार्य पंडित शक्तिधर शर्मा शास्त्री के अनुसार इससे पहले 1962 में अष्ट ग्रहों का योग बना था और आठ ग्रहों की युति एक साथ हुई थी। इसके अलावा हरिद्वार में इस वर्ष गुम होने के कारण भी मकर संक्रांति पर्व का महत्व ज्यादा है।
हिंदू धर्म में पुण्यदायी है यह दिन
इस दिन को हिंदू धर्म में काफी पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन किया जाने वाला दान अन्य दिनों के अपेक्षा कई गुना अधिक फलदायी होता है। भारत एक कृषि प्रधान देश है इसलिए यह फसलें किसानों के आय तथा जीवनयापन का एक प्रमुख जरिया है। यह वह समय होता है, जब भारत में खरीफ (शीत श्रृतु) के फसलों की कटाई की जाती है। इसीलिए अपने अच्छी फसलों के प्राप्ति के लिए, वह इस दिन का उपयोग ईश्वर को धन्यवाद देने के लिए भी करते हैं।


