digital house arrest
देहरादून। उत्तराखंड एसटीएफ ने साइबर ठगों के एक बेहद खतरनाक और देशभर में फैले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए “डिजिटल हाउस अरेस्ट” नामक स्कैम के मास्टरमाइंड को भोपाल सेंट्रल जेल से बी वारंट पर गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई एक महिला से ₹1.70 करोड़ की ठगी के मामले में की गई, जिसे अपराधियों ने मुम्बई क्राइम ब्रांच और CBI का अफसर बनकर वीडियो कॉल पर डिजिटल रूप से ‘हाउस अरेस्ट’ कर लिया था।
गिरफ्तार आरोपी दिनेश कुमार खींची पुत्र मंगल खींची, निवासी किशनगढ़, अजमेर (राजस्थान), इस हाई-टेक ठगी का मुख्य साजिशकर्ता है। एसटीएफ की साइबर क्राइम पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और महीनों की मेहनत के बाद उसे चिन्हित कर भोपाल जेल से गिरफ्तार किया। गिरोह का एक अन्य आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुका है।
ठगी का तरीका: डर, धोखा और डिजिटल फांस
इस ठगी का तरीका बेहद शातिराना और मनोवैज्ञानिक दबाव पर आधारित था। पीड़िता को एक फर्जी FedEx कॉल के जरिए बताया गया कि उसके नाम से मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग तस्करी से जुड़ा एक पार्सल पकड़ा गया है। इसके बाद स्काइप कॉल पर खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच व CBI अफसर बताकर उससे घंटों पूछताछ की गई और वीडियो रिकॉर्डिंग के बहाने दरवाजा बंद रखने व किसी से संपर्क न करने को कहा गया। डर के माहौल में पीड़िता ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी, कुल ₹1.70 करोड़, ठगों द्वारा बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दी।
तकनीकी टीम ने ऐसे खोला जालसाजों का राज़
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक STF नवनीत सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने बैंक खातों, मोबाइल नंबर, मेटा और गूगल से प्राप्त डेटा का विश्लेषण कर पूरे नेटवर्क की परतें खोलीं। निरीक्षक विकास भारद्वाज के नेतृत्व में एसटीएफ टीम ने विभिन्न स्थानों पर दबिश दी और डिजिटल साक्ष्यों के माध्यम से मास्टरमाइंड तक पहुँची।
क्या होता है “डिजिटल हाउस अरेस्ट” स्कैम?
यह एक उभरता हुआ साइबर अपराध का तरीका है, जिसमें जालसाज पीड़ित को सरकारी अधिकारी बनकर डराते हैं, वीडियो कॉल के जरिए ‘हाउस अरेस्ट’ कर देते हैं और मानसिक दबाव बनाकर उससे बैंक खातों की जानकारी लेकर बड़ी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते हैं। कई मामलों में ये ठग नकली ऑफिस सेटअप, फर्जी वर्दी और ID कार्ड तक दिखाते हैं।
पुलिस की अपील: डरें नहीं, सतर्क रहें
एसएसपी STF श्री नवनीत सिंह ने जनता से अपील की है कि यदि कोई आपको CBI, क्राइम ब्रांच, ED या अन्य एजेंसी बनकर वीडियो कॉल करता है या धनराशि मांगता है, तो तुरंत साइबर थाने में संपर्क करें। कोई भी सरकारी एजेंसी स्काइप या व्हाट्सएप पर इस तरह संपर्क नहीं करती। ऐसे मामलों की शिकायत 1930 हेल्पलाइन नंबर या www.cybercrime.gov.in पर दर्ज कराएं।
गिरफ्तारी टीम में शामिल अधिकारी:
निरीक्षक विकास भारद्वाज
उपनिरीक्षक राजीव सेमवाल
अपर उपनिरीक्षक सुरेश कुमार
कांस्टेबल शादाब अली
कांस्टेबल पवन पुण्डीर