उत्तराखंड स्वास्थ्य

देश से कुष्ठ रोग, काला अजार और मलेरिया को खत्म करें और राज्यों को भी टीबी मुक्त बनाएं : डॉ. मनसुख मांडविया

देश से कुष्ठ रोग
Written by admin

देश से कुष्ठ रोग

  • स्वास्थ्य मंत्रालय के दो दिवसीय स्वास्थ्य चिंतन शिविर का समापन
  • आइए हम सभी अपनी केंद्रित नीतियों के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का संकल्प लें कि हम राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आयुष्मान भारत कार्ड और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता आईडी से संतृप्त करेंगे। 
  • ‘आइए हम राज्यों के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए दूरदर्शी रोडमैप बनाने का संकल्प लें जो अमृत काल के दौरान देश की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को और मजबूत करने और इसे आम आदमी के लिए अधिक सुलभ और किफायती बनाने में हमारा मार्गदर्शन करेगा।’
  • चिंतन शिविर राज्यों के बीच संवाद की शुरुआत करता है, और मेरा मानना ​​है कि इन विचार-विमर्शों से देश में स्वास्थ्य सेवा प्रावधान में मजबूत परिणाम मिल सकते हैं : एसपी सिंह बघेल

हर्षिता टाइम्स। 

देहरादून। “जब हम इस गहन चिंतन शिविर से अपने राज्यों में वापस जाएं तो आइए हम इस सम्मेलन से मिली सीख का उपयोग करें और अपनी केंद्रित नीतियों के माध्यम से संकल्प लें कि हम देश को आयुष्मान भारत कार्ड और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता आईडी से संतृप्त करेंगे, और हमारे राज्यों को टीबी मुक्त बनाएं, और कुष्ठ रोग, कालाजार और मलेरिया को खत्म करने की दिशा में भी काम करें।

यह बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने देहरादून में दो दिवसीय स्वास्थ्य चिंतन शिविर के समापन पर अपने समापन भाषण में कही।

स्वास्थ्य चिंतन शिविर में सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री, प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल, टीएस सिंह देव (उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री, छत्तीसगढ़) की भागीदारी देखी गई।

ब्रजेश पाठक (उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री, उत्तर प्रदेश), बीएस पंत (पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री, सिक्किम), विश्वास सारंग (राज्य चिकित्सा शिक्षा मंत्री, मध्य प्रदेश), और के लक्ष्मी नारायणन (मंत्री) लोक निर्माण विभाग, पुडुचेरी), धन सिंह रावत (उत्तराखंड), रजनी विदाला (आंध्र प्रदेश), अलो लिबांग (अरुणाचल प्रदेश), केशब महंत (असम), रुशिकेश पटेल (गुजरात), बन्ना गुप्ता (झारखंड) सहित विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री), दिनेश गुंडू राव (कर्नाटक), सपम रंजन सिंह (मणिपुर), डॉ. आर. लालथ्यांगलियाना (मिजोरम), श्री थिरु मां। सुब्रमण्यन (तमिलनाडु) ने विचार-मंथन समापन सत्र में भाग लिया।

दो दिवसीय सम्मेलन में 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे (देश से कुष्ठ रोग) :-

सम्बोधन में मांडविया ने कहा, ‘आइए हम एक विजन डॉक्यूमेंट तैयार करें जो देश के अमृत काल के अगले 25 वर्षों के लिए एक रोडमैप की तरह काम करेगा जो हमारे राज्यों के नागरिकों को सर्वाेत्तम स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की दिशा में हमारे प्रयासों का मार्गदर्शन करेगा।’

उन्होंने केंद्र और राज्यों को देश के लिए भविष्य की स्वास्थ्य नीतियां बनाने के लिए मिलकर काम करने की सलाह दी। उन्होंने राज्यों को अपने स्वयं के चिंतन शिविर आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया, जहां उनकी विशिष्ट स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुसार स्थानीय समाधान निकाले जा सकते हैं।

उन्होंने स्वास्थ्य सेवा को और अधिक समावेशी बनाने के लिए नीति निर्माण में नई पीढ़ियों की आकांक्षाओं और विचारों को शामिल करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल :-

समापन समारोह में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा, ‘इन दो दिनों में राज्यों में खुली बातचीत हुई और मेरा मानना ​​है कि इन विचार-विमर्श से देश में स्वास्थ्य देखभाल प्रावधान में मजबूत परिणाम मिल सकते हैं।’

इस दो दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन भारत में चिकित्सा शिक्षा की स्थिति से लेकर राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन मिशन, जिला रेजीडेंसी कार्यक्रम और आयुष्मान भव तक स्वास्थ्य सेवा के विभिन्न पहलुओं पर सत्र आयोजित किए गए।

वीके पॉल, सदस्य (स्वास्थ्य), नीति आयोग, राजेश भूषण, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव, सुधांश पंत, विशेष कर्तव्य अधिकारी, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष, डॉ. राजीव बहल, कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, साथ ही उद्योग निकायों के नेता उपस्थित थे।

 

 

About the author

admin

Leave a Comment